█░░░░░░░░░░░░█ : - मंगलमय.सुप्रभात. ..ॐ नमः शिवाय .
. . . . .मनुष्य - मनुष्य पशुओं से भी अधिक खतरनाक हैं ?मनुष्य जीवन अच्छा, इतना कहने से ही इसकी सार्थकता नहीं है. यह जीवन भोग के लिए, मोज के लिए, दुनिया की सभी चीजों के उपभोग के लिए ही है, इस प्रकार समझानेवाले मिलें तो ? तो परिणाम भयंकर हैं।
यदि चाहे जो खाना, चाहे जो पीना, पहिनना, ओढना और इच्छानुसार वर्तन करना, इसमें ही मनुष्य जीवन की सफलता हो तो मनुष्यजीवन और पशुजीवन में अंतर नहीं है।
आप ज्ञानी किसलिए हैं ? पशु किसी को मारे तो गुनहगार नहीं क्योंकि वह अज्ञानी है, किन्तु मनुष्य मारे तो गुनहगार माना जाएगा, क्योंकि दुनिया ने आपको समझदार माना है। मनुष्य की प्रवृत्ति मनुष्य के तरीके की चाहिए। मनुष्यभव ऊंचा मानने से ही काम होता तो सभी मानव पूजापात्र बन जाते। बहुत से मनुष्य ऐसे भी हैं कि जो जेल में बिठाने के लायक ही हैं।
दुनिया में जिनका नाम भी लेने में दुनिया पाप मानती है, जिनका मुँह देखना भी पाप माना जाता है, ऐसे भी मनुष्य हैं न ?
मनुष्य वो जिसमें मनुष्यत्व हो. जो पाप से डरे, जिसका जीवन सदाचार युक्त हो, जो सत्य और न्याय के मार्ग पर चले, मनुष्यभव में आकर अपना आत्मकल्याण करने का जिसका लक्ष्य हो, क्योंकि यही वह भव है, जिससे मनुष्य मोक्षगामी बन सकता है और परम सुख प्राप्त कर सकता है। सांसारिक सुख तो सुखाभास मात्र हैं, असली सुख और आनंद तो आत्मा का चरमोत्कर्ष करने में है।
* जो मुक्त है सारी प्रकृति उस की वन्दना करती है, सारा विश्व उसके सामने सिर झुकाता है
🌼🌼🌼🌼🌼 Tip Of The Day...🌼
🌼 कभी आप खुले आसमान के निचे अपनी कमाई रख कर देखिये ,
रात भर नींद नहीं आयेगी....!
सोचिये किसान पे क्या गुजरती होगी ???

No comments:
Post a Comment